जादुई सीढ़ी -सफलता के जादुई सीढ़ी के 16 पायदान –

जादुई सीढ़ी -सफलता के जादुई सीढ़ी में कोई ऐसी बात तो जरूर है जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता है। लेकिन इसे पढ़ने वाले सभी लोग ,चाहे वो आमिर हों या गरीब सभी आकर्षित होते ही हैं। 

शक्ति सच्ची शिक्षा से मिलती है ! जिस किसी व्यक्ति ने किसी निश्चित लक्ष्य के प्रति मन की शक्तियों को व्यवस्थित करना ,श्रेणीबद्ध करना और बुद्धिमता पूर्वक निर्देशित करना नहीं सीखा वो शिक्षित नहीं है। 

आइये एक एक करके 16 पायदान सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं –

पायदान : 1 : जीवन में निश्चित लक्ष्य। 

निश्चित शब्द के महत्व को नजरअंदाज न करें ,क्यूंकि यही शब्द जीवन  निश्चित लक्ष्य वाक्यांश का सबसे अहम् शब्द है। निश्चित के बिना वाक्य में कोई डैम नहीं है ,क्यूंकि सफल होने के लिए अस्पस्ट लक्ष्य तो सभी के पास होते हैं। 

निचित लक्ष्य और उसे हासिल करने की योजना लिखें ,मैं लिखने पर जोर दे रहा हूँ क्यूंकि इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण है ,जिसे आप आगे के पायदान में  समझेंगें। 

पायदान :2 – आत्मविश्वास 

जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य बनाना या इसे हासिल करने की योजना बनाना तब तक कारगर नहीं ,जब तक व्यक्ति  में आत्मविश्वास न हो वैसे तो सभी व्यक्तियों में आत्मविश्वास होता है लेकिन चंद लोगों में उस  खास तरह का आत्मविश्वास होता है जिसे जादुई सीढ़ी का दूसरा पायदान कहते हैं। 

पायदान :3 – पहल 

पहल एक दुर्लभ गुण है। इसका मतलब है की किसी दूसरे के कहे बिना ही वह काम करना ,जो किया जाना चाहिए। सभी महान लीडरों में पहल एक अनिवार्य गुण है। पहल के बिना कोई सेनापति नहीं बन सकता ,न कोई तो कोई युद्ध में न ही कारोबार में ,क्यूंकि गहन कर्म पर आधारित सेनापतित्व ही सफल होता है। 

पायदान 4 : कल्पना 

कल्पना मानव मस्तिष्क की वह कार्यशाला है जिसमें पुराने विचार नए विचार के तालमेलों और योजनाओं को ढलते हैं। सारे महान अविष्कार का अस्तित्व ही कल्पना है। चाहे वो बल्व का हो या हवाई जहाज ,चाहे इंटरनेट या कुछ भी आज जो आप धरातल पर देख प् रहे हैं पहले वह किसी की कल्पना ही थी। 

नोट – लीडर हमेशा कल्पना और पहल वाले होते हैं। 

पायदान : 5 – कर्म 

संसार केवल आपको एक ही चीज के बदले में पैसा देता है ,यह है कर्म। संगृहीत ज्ञान का कोई मोल नहीं है ,इससे तबतक कोई फायदा नहीं होता जब तक की इसे कर्म में न बदल दिया जाये। 

हो सकता है आप बहुत ज्ञानी हैं ,आप सबसे कॉलेज या विश्वविद्यालय में पढ़ें हो -यह भी मुमकिन हो आपके दिमाग में सरे विवकोशों के सरे तथ्य भरे पड़ें हों -लेकिन तब तक इस ज्ञान का कोई फायदा नहीं जब तक इसे आप कर्म न बदलें। 

आगे के पायदान के बारे आगे के ब्लॉग में जानेंगे सफलता के  जादुई सीढ़ी ,पर दोस्तों आपसे रिक्वेस्ट है की अगर आपको मेरा पोस्ट पसंद आ रह है तो लाइक और शेयर करना न भूलें धन्यवाद। 

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•हर लीडर को चरित्र के बारे में कौन सी बातें मालूम होनी चाहिए


•1 . चरित्र सिर्फ शब्दों से नहीं बनता है– कोई भी खुद को ईमानदार कह सकता है ,लेकिन कार्य ही चरित्र के वास्तविक सूचक होते हैं आपका चरित्र ही तय करता है की आप क्या दरअसल कौन है ? इसी बात से तय होता है की आप क्या देखते हैं। आप क्या देखते हैं उसी से तय होता है की आप क्या करते हैं। इसलिए लीडर के चरित्र को उसके कार्यों से अलग से अलग कभी नहीं किया जा सकता है। यदि लीडर के कार्य और कथन एक दूसरे के निरंतर विरोध में हों तो वास्तविकता पता लगाने के लिए उसके चरित्र की ओर देखें। 

•. प्रतिभा एक वरदान है ,जबकि चरित्र आका चयन है – जीवन में बहुत सी चीजों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। हम अपने माता-पिता को नहीं चुन सकते। हम अपने जन्म और परवरिश की जगह या परिस्थतियाँ नहीं चुन सकते। हम अपनी प्रतिभा या आईक्यू को नहीं चुन सकते। लेकिन अपने चरित्र का चुनाव हम खुद करते हैं। वास्तव में हम जब भी कोई चयन करते हैं ,तो हम हर बार अपने चरित्र का निर्माण करते हैं -या हम किसी मुश्किल स्थिति से मुकबला करते हैं या इससे बचकर निकल जाते हैं ; या तो हम आसानी से मिलने वाला धन ले लेते हैं या फिर हम कीमत चूकते हैं। अपना जीवन जीते और चयन करते समय आज भी आप अपने चरित्र का निर्माण कर हैं।  

चरित्रवान होने से लोगों के साथ  सफलता  मिलती है। -सच्चे नेतृत्व में हमेसा दूसरे लोग शामिल होते हैं। ( जैसे की नेतृत्व की एक एक कहावत है ,अगर अगर आप सोंचते हैं की आप नेतृत्व कर रहे हैं ,लेकिन कोई भी आपका अनुसरण नहीं कर रहा है ,तो सिर्फ आप टहल रहे हैं। ) अनुयायी उन लीडर्स पर विस्वास नहीं करते हैं जिनका चरित्र उन्हें दोषपूर्ण लगता है। इसलिए वे आपका अनुसरण भी नहीं करेंगे। 

लीडर्स अपनी चारित्रिक सीमाओं से ऊपर नहीं उठ सकते।  –

क्या आपने देखा है की बहुत से प्रतिभाशाली लोग एक निश्चित स्टार सफलता हासिल करने के बाद अचानक धड़धड़ाकर गिर गए ? इसका मूल  कारण है -चरित्र। 


हारवर्ड मेडिकल स्कूल के मनोवैज्ञानिक और द सक्सेस सिंड्रोम के लेखक स्टीवन बर्गलेस कहते हैं की जो लोग ऊँचे शिखर पर पहुँच जाते हैं ,लेकिन उनके पास तनाव के बिच शक्ति देने वाले चरित्रिक नीवं नहीं होती है ,वे दरअसल तबाही की ओर बढ़ रहे हैं। 

सफलता के लिए सर्वश्रेष्ठ बनें।

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सर्वश्रेष्ठ बनें

सफलता के लिए सर्वश्रेष्ठ बनें। खुद को आजीवन विकास और व्यक्तिगत उत्क्रिस्टता  प्रति समर्पित।  इसमें जबरदस्त समर्पण ,आत्म -अनुसासन और इक्षाशक्ति की जरुरत होती है।

जब भी आप हर बार नया सीखते हैं और उसपर अमल करते हैं ,तो हर बार आपको शक्तिशाली बनने का अहसास होगा। 

सबसे पहले आपको यह याद रखना होगा की आप यदि बाज बनना चाहते हैं तो आज ही कौवे का साथ छोड़ दें ,बाज का ही अनुकरण करें। 

सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए कुछ कदम दिए जा रहे हैं जिस पर आप चलकर सर्वश्रेष्ठ बन सकते हैं। 

आज ही स्वयं में निवेश करने और निरंतर बेहतर बनने का निर्णय लें ,जैसे की आपका भविष्य इस पर निर्भर हो-क्यूंकि यह सचमुच निर्भर है। 

अपनी  सभी योग्यताओं को पहचानें जिनसे ऑफिस में मिलने वाले परिणामों की गुणवत्ता और मात्रा तय होती है। इसके बाद हर महत्वपूर्ण योग्यता में माहिर बनने की योजना बनायें। 

अपने क्षेत्र के किसी शीर्षस्थ व्यक्ति को चुनें ,जिसकी आप सबसे ज्यादा कद्र करते हों। उसे अपनी प्रगति का रोल मॉडल बना लें। 

तीन से पांच साल तक आगे देखकर यह अनुमान लगाएं की भविष्य में अपने क्षेत्र में अग्रणी रहने के लिए आपको किस ज्ञान की जरुरत और आज से ही सीखना सुरु कर दें 

आज ही आजीवन ज्ञान को अर्जन की प्रक्रिया के प्रति समर्पित हो जाएँ। किसी क्षेत्र में बेहतर बनें बिना एक दिन भी न गुजरने दें। 

अपने लक्ष्य को हरदिन दोबारा लिखें। -जब आप हर सुबह अपना लक्ष्य दोबारा लिखते हैं ,यो आप दिन भर इन लक्ष्यों तक पहुंचने के अवसर तलाशेंगे या उनके बारे में सोंचेंगे। आपका  एकाग्रता बढ़ेगा। 

अपनी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से स्वीकार करें और अपनी आर्थिक स्थिति के समस्यायों के लिए दूसरे को दोष देना बंद कर दें। अब वो कदम उठायें जिससे की आपकी आर्थिक स्थति बेहतर हो सके। 


हम वही बन जाते हैं ,जो हम बार -बार करते हैं ; यानि उत्क्रिस्टता कोई कार्य नहीं ,बल्कि एक आदत है। -अरस्तु। 

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प्रेरणा – FOR DAILY MORNING

प्रेरणा 

लोग अकसर कहते हैं की प्रेरणा कायम नहीं रहती। देखिये ,स्नान भी नहीं रहता -इसलिए हम प्रतिदिन करने की सलाह देते हैं। 

 – जिग जिग्लर। 

प्रोत्साहन अकेले ही काफी नहीं है। अगर आपके पास एक मुर्ख है और आप उसे प्रोत्साहित  देते हैं ,तो अब आपके पास एक प्रोत्साहित मुर्ख होता है। 

– जिम रॉन। 

आम धारणा यह है की प्रेरणा कर्म से आती है , लेकिन इसके विपरीत सच  यह है की – कर्म प्रेरणा से पहले आता है। आपको पम्प में पानी डालना , ताकि माहौल बन जाये ,जो आपको अपने लक्ष्यों पर काम करने के लिए प्रेरित करता है। गति में आना काम का सबसे मुश्किल हिस्सा है और अक्सर पहला कदम उठाना ही प्रायप्त है , जो आपको अपने दिन का सर्वश्रेष्ठ लाभ उठाने के लिए  प्रेरित कर देता है। 

– रॉबर्ट जे. मैकेन। 

आपकी कार की बैट्री की तरह ही सेल्समैन की ऊर्जा भी लगातार कम होती रहती है। जब तक की उसे बार-बार रिचार्ज न किया जाये ,वह जल्द ही ऊर्जाहीन हो जाता है। यह बिक्री नेतृत्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारियां में से एक है। 

– जियान – कार्लो मेनोटो। 

जो लोग खुद को प्रोत्साहित नहीं कर पाते हैं वे सामान्य जीवन ही गुजारेंगे ,चाहे उनके गन कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों। 


– ली आयकोका।

 

सफल लोग दूसरे सफल लोगों को प्रेरणा के साधन की तरह देखते हैं। वे दूसरे सफल लोगों को मॉडल की तरह देखते हैं ,जिनसे सीखा जा सकता है। वे खुद से कहते हैं ,अगर वे यह काम कर सकते हैं ,तो मैं भी कर सकता हूँ। 

– टी. हर्व एकर। 

जो आगे नहीं देखता है ,वह पीछे रह जाता है। 

-स्पेनिश सूक्ति। 


ब्रिटिश कहावत है ,ख़राब विद्यार्थी कोई नहीं होता;सिर्फ खराब शिक्षक होते हैं। मैं मानता हूँ की यह कहावत कंपनियों पर भी लागु होती है। ख़राब कर्मचारी कोई नहीं होता ; सिर्फ ख़राब मैनजर होते हैं। 

– टी. एस. लिन। 

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खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे

खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे -ये नुस्खे आजमाएं हुए हैं और अचूक हैं। 

प्रत्येक दिन का आरम्भ और समापन अपने जीवनसाथी के लिए प्यार की घोषणा से करें  संभव हो सके तो बस बात करने  और अपने प्यार को व्यक्त करने के तीन मिनट लगाइये। 

कभी-कभी उपहार अथवा कार्ड भेंट करके चकित कीजिये। कभी-कभी डाक में प्रेम-पत्र डालिये। उपहार या पत्र लिखने के पीछे छिपे भावनाओं में जादू है। 

साथ में कुछ अच्छा  समय बिताइए। साथ टहलने जाएँ ,अपने जीवनसाथी को ऐसा अनुभव कराएं जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। भले ही इस वक़्त आपको  बात  अहसास ना हो। 

अच्छा श्रोता बनिए, दुनिया में सबसे ज्यादा लड़ाई इसी चीज की है की कोई किसी को सुन ही नहीं रहा है। बच्चा अपने पिता को नहीं सुनता ,वहीं बच्चे को शिकायत है की पिता मेरी बात नहीं सुनते हैं। पति और पत्नी के अक्सर इसी बात को लेकर झगड़े होते हैं की वो एक-  दूसरे को सुनते ही नहीं हैं। 

जब आप असहमत होते हैं तो याद रखिये की आप अस्वीकार्य हुए बिना भी असहमत हो सकते हैं। तथापि आपको अनसुलझे मतभेदों के साथ कभी भी विस्तर पर सोने के लिए नहीं जाना चाहिए। ना तो आप सो पाएंगे और ये मतभेद आपके अवचेतन मन में घर कर लेंगे तथा निरंतर समस्या के श्रोत  बन जायेंगे। आप ईमानदार  एक दूसरे के प्रति संवेदनशील बने रह सकते हैं। 

याद रखिये आपको अपने जीवनसाथी को खुश करने या समझने के लिए अक्सर पीठ से पीछे की ओर झुकना पड़ेगा। यह मुद्रा थोड़ी कष्टदायक हो सकती है परन्तु यह आपको और आपके विवाहित जीवन के मुँह के बल गिराने से रोकती है। 

खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे को आजमाइए ;

  1. कप – प्यार 
  2. कप -एकनिष्ठा 
  3. कप – क्षमाशीलता 
  4. औंस – विस्वास 
  5. चमच्च – उम्मीद 
  6. कप – मित्रता 

और 1 बैरल हंसी। 


प्यार और एकनिष्ठा को लेकर विस्वास के साथ पूरी तरह मिलाएं। इसे नरमी उदारता और समझदारी से मिश्रित करें। उसमें मित्रता व् उम्मीद डालें। भरपूर तरीके से हंसी छिड़के।

सूरज की धुप में इसे पकाएं और फिर प्रत्येक दिन इसे जी भरकर पेश करें। 


याद रखिये खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे में सबसे महत्वपूर्ण है पहल ,चाहे  प्यार  इजहार करने के लिए हो या आपस के मतभेद मिटाने की पहल। जो पहल करता है वह अधिक परिपक्वता और प्यार दर्शता है। 

धन्यवाद ,
दोस्तों मुझे उम्मीद है की आपको आज का या पोस्ट-खुशहाल वैवाहिक जीवन के अचूक नुस्खे पसंद आया होगा ,जिसे मैंने लिया है एक शानदार किताब जिसका नाम है शिखर पर मिलेंगे और जिसके लेखक हैं -जिग जिग्लर। 

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सेल्स लाइन में ग्राहक को राजी कैसे करें ?

सेल्स की दुनिया में सबसे अहम् सवाल यही है : आप ग्राहक को राजी कैसे करें ? जवाब है आप ग्राहक के किसी सवाल पूछने पर उसका जवाब न देकर बदले उस सवाल के सवाल पूछकर राजी कर सकते हैं। 


आपमें जिन लोगों ने भी बाइबिल पढ़ी होगी वे जानते होंगे की ईसा मसीह लोगों को राजी करने और विस्वास दिलाने मून बेजोड़ थे। क्यूंकि आप जब बाइबिल को ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको आचर्यजनक चीज पता चलेगी। जब लोग ईसा मसीह से सवाल पूछते थे तो वे पलटकर सवाल पूछते थे या फिर कोई निति कथा सुनते थे-ये दोनों बातें विस्वास दिलाने के लिए अचूक उपाय हैं। 


सही सवाल और गौर से सुनने से सम्बन्ध मजबूत बनाने में मदद मिलती है ,जो  राजी करने की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। 
एफसीबी लिबर कार्टज पार्टनर्स के वाइस चेयरमैन लॉरेल कहते हैं ,-जीवन मूल्य व्यवहार तय करते हैं : व्यवहार प्रतिष्ठा तय करता है ; प्रतिष्ठा मुनाफा तय करती है। आज ही अखंडता की छवि बनाना शुरू करें। मैं आपसे जल्द ही सफलता के सिखर पर मिलूंगा। 


आपको यह याद रखना चाहिए की नजरिया हमेशा आपकी टीम का खिलाडी होता है। 
अगर आप सेल्स लाइन में हैं तो आपको यह याद रखना चाहिए की कई मौके पर लोग दरवाजे को आपके मुँह पे धड़ाम से बंद कर देंगे। वे बिना किसी कारण के फ़ोन काट देंगे। कुछ लोग सामजिक समरोह में आपसे कतराने लगेंगे। यह सेल्स लाइन का साइड इफेक्ट्स है। 


अगर आप सेल्स प्रोफेशनल लोगों को खरीदने के लिए राजी करने की योग्यताओं को कम्पनी के हेडक्वार्टर में पहुंचना चाहते हैं तो स्पस्ट रूप से उन्हें दूसरों को राजी करने का तरीका भी आना चाहिए। 

सेल्स की दुनिया में ग्राहक एक और चीज को हमेसा महत्व देता है। यह चीज है विस्वास ,जो सेल्समैन की अखंडता का सिद्धांत का सीधा प्रतिबिम्ब है। 

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सवाल ही जवाब  है

दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार 

धन्यवाद दोस्तों ,

आज का पोस्ट मैंने लिया है सेलिंग 101 किताब से जिसके लेखक है -जिग जिग्लर । अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो प्लीज शेयर जरूर करें। सच में आप मेरी बात को मानकर इस किताब को जरूर पड़ें।

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बिक्री में सफलता

बिक्री में सफलता कैसे प्राप्त करें ?-बिक्री करते समय मिनटों का अभ्यास करें।

यह सिद्धांत कहता है की यदि आप ग्राहकों के साथ कुछ मिनट रहकर पैसे कमा रहे हैं तो इस काम में ज्यादा समय या मिनट लगाकर आप अपनी बिक्री बढ़ा सकते हैं। 

जब कोई सलेसपर्सन संभावित ग्राहकों के साथ फोन पर या आमने-सामने बिताये गए मिनटों की संख्या को दोगुना कर लेता है,तो प्रायः हर प्रकरण में उसकी बिक्री दोगुनी हो जाती है। यह कोई संयोग नहीं है। यह तो एक नियम के कारण होता है : संभानाओं का नियम। 

बिक्री में सफलता की कुंजियाँ –

बिक्री के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के मामले में आपकी दो जिम्मेदारियां हैं :

1. सबसे पहले तो  आपकी  छन्नी हमेशा भरी होनी चाहिए। दिन भर में आप जितने  प्रॉस्पेक्ट्स से मिल सकते हों , आपके पास उससे ज्यादा प्रॉस्पेक्ट्स की सूचि होनी चाहिए। कभी भी आपकी छन्नी खली न रहने दें। कभी प्रॉस्पेक्ट्स की कमी न पड़ने दें। 

2. दूसरी बात , बिक्री के हर चरण में निरंतर बेहतर बनते रहें। प्रोस्पेक्टिंग , प्रस्तुति और सेल्स क्लोज करने की अपनी योग्यताओं को लगातार निखारते रहें। इसके लिए ऑडियो प्रोग्राम सुनें। आप जितने ज्यादा निपुण बनते हैं ,छन्नी के निचे से बिक्री निकालने के लिए आपको छन्नी के ऊपर उतने ही कम प्रॉस्पेक्ट्स की जरुरत पड़ेगी। 

बिक्री में सफलता के लिए जल्दी सुरु करें-

खुद को अनुशासित करके अपनी पहली कॉल सुबह 7 – 8  बजे तक कर लें। जब आप संभावित ग्राहक को सामान बेचकर अपना दिन सुरु करते हैं तो आपमें ज्यादा ऊर्जा होगी और आप दिन भर बेचते रहने के लिए प्रोत्साहित होंगें। 

स्वयं को सेल्स कारपोरेशन का प्रेजिडेंट माने ,जो बिक्री के परिणामों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। सर्वोच्च आमदनी वाले सेल्स पीपल का यही नजरिया होता है। 

सटीकता से तय करें आपको वास्तव में अपनी मनचाही आमदनी कमाने के लिए कितने प्रोडक्ट्स या सेवाएं बेचने की जरुरत है ?

खुद को समर्पित कर  दें ,आप हरदिन पुस्तकें पढ़कर ,कार यात्रा में ऑडियो टेप सुनकर और सेल्स सेमिनार्स में हिस्सा लेकर बिक्री निरंतर बेहतर करते बनेंगे। 

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आत्म- अनुसासन और लगन

आत्म- अनुसासन और लगन – लगन सक्रीय आत्म-अनुसासन है। जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता है आप कितनी बार निचे गिरते हैं। सारा फर्क तो इस बात से पड़ता है की आप कितनी बार उठकर दोबारा खड़े होते हैं। अगर आप किसी काम में आत्म- अनुसासन और लगन –  के साथ जुटे रहेंगे तो अंत में आप सफल हो जायेंगे। 


 लगन एक सक्रीय अनुशासन है।

विपत्तियों और अस्थायी असफलताओं के वावजूद काम करने की क्षमता जीवन में सफलता पाने के लिए अनिवार्य है। 

नेपोलियन हिल ने कहा था -लगन चरित्रवान व्यक्ति के लिए वैसी ही है ,जैसे कार्बन स्टील के लिए। लगन सफलता का प्राथमिक कारण है। 

जल्दी से महान बनने के प्रयास से सचेत रहें। 10000 में से एक प्रयास ही कामयाब हो सकता है। यह बहुत भयावह अनुपात है।

                           – बेंजमिन डिजराइल। 

पहचाने की आपके जीवन का वह क्षेत्र कौन सा है ,जिसमें आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने केलिए ज्यादा लगन से काम करना चाहिए। फिर उस क्षेत्र में काम सुरु करें। 

अपने जीवन का लक्ष्य पहचाने ,जिसे प्राप्त करने में आप सिर्फ इसलिए नाकाम रहे ,क्यूंकि आप अंत तक लगन नहीं रख पाए। उस क्षेत्र में सफल होने के लिए आप आज कौन से कदम उठा सकते हैं ?

पहचाने की आप किस बड़े लक्ष्य को सिर्फ इसलिए प्राप्त कर पाए ,क्यूंकि आप लगन से जुटे रहे और अपने मुश्किलों के वावजूद हार मानने से इंकार कर दिया। 

जीवन में अपना प्रमुख लक्ष्य तय करें -वह लक्ष्य जिसे प्राप्त करने से आपके जीवन में अच्छा प्रभाव पड़ेगा। 

आज ही निर्णय लें की चाहे जो हो जाए ,आप सफलता मिलने तक जुटे रहेंगे ,क्यूंकि मुझे सफल होने से रोक नहीं सकता। 

 

महत्वपूर्ण लक्ष्य तय करने और उसे प्राप्त करने का संकल्प करें। यह संकल्प करें की आप राह में आने वाली अवश्यम्भावी मुश्किलों ,समस्याओं और विपत्तियों के वावजूद तब तक जुटे रहेंगे ,जब तक की आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल न हो जाएँ।

यह प्रक्रिया बार-बार तब तक दोहराते रहें ,जब तक की लगन की आदत न पड़ जाए। 

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मन गांठें खोलो

आज के पोस्ट में एक शानदार कहानी जो की मैंने सूर्या सिन्हा के किताब कहानी बोलती है से लिया है ,कहानी का शीर्षक है – मन  गांठें खोलो

मन  गांठें खोलो -पुराने ज़माने की बात है। एक व्यापारी ऊंटों पर सामान लादकर शहर-शहर जाता और व्यापर करता। एक बार सामान बेचकर वह वापस अपने देश लौट रहा था रास्तें में रात हो गई वह एक सराए पर रुका।

सराए के बहार एक पेड़ के निचे व्यापारी अपने ऊंटों को बाँधने लगा। चार ऊंट बाँध दिए ,मगर पांचवे ऊंट के लिए रस्सी काम पड़ गई। जो ऊंट खड़ा था ,उसे इन्तजार था की मालिक भी उसे खूंटे से बांधेगा तो वह भी बैठकर जुगाली करे और थकन मिटायें ,मगर मालिक परेशान था। 
 कहीं ,रास्ते में खो गई थी अब ऊंट को बांधे कैसे ? यदि ना बंधा ऊंट तो दर था की ऊंट रात को कहीं चला ना जाये ,अब व्यापारी क्या करे !


जब कुछ ऊंट के मालिक को कुछ नहीं सुझा तो उसने सोंचा की क्यों ना सराय के मालिक से मदद मांगी जाये और यही सोंचकर आगे बड़ा तो उसने देखा की एक मस्तमौला फ़क़ीर सीधी पे बैठा हुआ था। वह काफी देर से व्यापारी को देख रहा था। व्यापारी करीब आया तो उसने पूछा की क्या परेशानी है ?

बाबा ऊंट की हिफाजत कैसे करूँ , एक ऊंट के लिए रस्सी काम पड़ गई है। 


फ़क़ीर हंसा ,मगर व्यापारी उसकी हंसी का अर्थ नहीं समझा – जैसे ही व्यापारी आगे  तो ,क्यूंकि वयापारी ने सोंचा की सराय के मालिक से रस्सी मांगू। 
इसकी कोई जरुरत नहीं है ,जाओ पांचवें ऊंट को वैसे ही बांधों जैसे चार ऊंट को बाँधा है। 
मगर रस्सी…… ?


मैंने कहा न , रस्सी की कोई जरुरत नहीं है ,तुम जाओ और सिर्फ बाँधने का अभिनय करो ऊंट को ऐसे लगे की सच में तुम रस्सी से बाँध रहे हो ,वह फिर कहीं नहीं जायेगा। 


वयापारी ने फ़क़ीर की बात मान ली और वापस जाकर वैसा ही जैसा की फ़क़ीर ने कहा था ,उसने कल्पना की रस्सी से बाँधने का अभिनय किया और कमल की बात यह थी की काल्पनिक रस्सी से बांधते ही वह ऊंट इत्मीनान से बैठ गया और जुगाली करने लगा अन्य ऊंटों की तरह ही।

सुबह हुई। व्यापारी को अब सफर में आगे वापस अपने देश निकलना था। उसने ऊंट भी हांका ,जिसे काल्पनिक रस्सी से बनवा वह ऊंट उठा ही नहीं बाकि सभी ऊंटों के रस्सी खोलते ही उठ खड़ा हुआ। 
उसने ऊंट को डंडे से पीटने लगा क्यूंकि ऊंट के अड़ियलपन पे बहुत गुस्सा आया ,ये उठ नहीं रहा है। 


तभी फ़क़ीर वहां आ गया -इस बेजुबान पर जुल्म क्यों कर रहे हैं ?


देखिये न बाबा ! यह कम्बख्त उठ ही नहीं रहा है  , यह उठेगा कैसे तुमने कल रात को काल्पनिक रस्सी इसके  था खोला तुमने ? 

अगर तुमने रात को रस्सी से नहीं बंधा होता कहीं चला जाता न ऊंट तुम्हारा ,हाँ बाबा पर मैंने तो सिर्फ अभिनय किया बांधने का। 

बिलकुल ठीक जैसे तुंमने बाँधने का अभिनय किया था उसी तरह खोलने का भी करो। व्यापारी ने ठीक वैसे ही खोला जैसे रात को काल्पनिक रस्सी से बंधा था ,उसने पेड़ से रस्सी खोलने और फिर उसके बाद ऊंट के गले से रस्सी खोलने का अभिनय किया। 


आश्चर्यजनक तरीके से ऊंट उठ खड़ा हुआ और अपने साथियों  से जा मिला। व्यापारी ने फ़क़ीर को देखा तो वह मुस्कुरा रहा था। 
जिस तरह यह ऊंट अदृश्य रस्सी  बंधा था और उठ नहीं रहा था , उसी तरह लोग रूढ़ियों से बंधे हैं

इसलिए एक ही जगह पर चलना चाहते हैं यह संसार इसलिए दुखी है और कास्ट में है ,क्यूंकि रूढ़ियों से बंधा है ,मन से बंधा है। 
यह कहकर फ़क़ीर चला गया और व्यापारी ुसवके शब्दों में छिपे गूढ़ रहस्य को समझने की कोसिस करने लगा। 
शिक्षा – इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है की –


हमारी असफ़लतों का मूल कारण यही है की हलोग मन से बंधे हैं। पुराणी और घिसी-पीती परम्परओं और रूढ़िवादी विचारों से बंधे हैं। इसलिए चल नहीं रहे हैं। घिसत रहे हैं। यह ऊंट भी ोइन्तेजार में है की रस्सी खोले कौन ?

सभी बंधे पड़े हैं काल्पनिक रस्सी के गांठों से। 
अपने मन से असफ़लता का काल्पनिक भय निकालो। कारण यह वह रस्सी है बांधे हुए हैं और आगे बढ़ें से रोक रही है ,उस रस्सी को तोड़ो और आगे बढ़ने के लिए कमर कस लो।

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बाज का बच्चा

एक घने जंगल में एक बार एक बाज का अंडा किसी तरह जंगली मुर्गी के अण्डों के बिच चला गया और बाकि बाकि अण्डों के साथ मिला गया ,चूँकि अंडे तो सभी सामान होते हैं क्या मुर्गी और क्या बाज। 

जैसे मुर्गी अपने अन्य अंडे का सेवा कर रही थी वैसे ही उसने बाज के अंडे का भी सेवा किया और कुछ दिनों के बाद समय आने पर अंडा फूटा। 

सभी अण्डों से चूजे निकले और बाज के अंडे से भी चूजा निकला। बाज का बच्चा यह अंडे से निकलने के बाद यह सोंचता हुआ बड़ा हुआ की वह एक मुर्गी है।

बाज का बच्चा भी वही काम करते जो अन्य मुर्गी के बाचे करते थे। जैसे अन्य बच्चे जमीन खोदकर अनाज के दाने चुगता और मुर्गी के बच्चे की तरह चूं-चूं करता था।

जब बच्चे खेल-खेल में कुछ फिट तक उड़ते थे और बाज का बच्चा भी वही कोसिस करता था और वह भी कुछ फिट तक उड़ता था।

एक बार की बात है जब बाज का बच्चा उन मुर्गी के बच्चे और मुर्गी के साथ जंगल में अपने दिनचर्या में लगे थे तभी सभी ने आकाश में एक बाज को उड़ते हुए देखा और उन्होंने देखा की बाज आकाश में कुलांचे भर भर रहा था ,मंडरा रह था। 


बाज का बच्चा  ने पूछा माँ इस सुब्दर सी चिडयां का क्या नाम है ? मुर्गी ने कहा – उस सुन्दर चिड़िया का नाम है बाज। फिर उस बच्चे ने -बाज के बच्चे ने पूछा -माँ क्या मैं भी इस बाज की तरह ही उड़ सकता हूँ ? बाज ने कहा-कभी नहीं ! तुम मुर्गी हो और मुर्गी उस बाज की तरह नहीं उड़ सकते हो। 

उस बाज के बच्चे ने बिना सोंचे-विचारे इस बात को मान लिया और विडंबना देखिये की वह बाज का बच्चा ने मुर्गी के बिच में रहकर मुर्गी की तरह जिया और मुर्गी की तरह ही वह मर गया।

सोंचने की क्षमता न होने के कारन वह विरासत को खो बैठा। कितना बड़ा नुकसान हुआ। वह जितने के लिए पैदा हुआ था , पर वह दिमागी रूप से हार के लिए तैयार हुआ।

Moral -अधिकतर लोगों के लिए यही बात सच है। जैसा की ओलिवर बेंडहाल होम्स ने कहा है – हमारे जिंदगी का दुर्भाग्यपूर्ण पहलु यह है की ज्यादातर लोग मन में कुछ करने की इक्षा लिए ही कब्र में चले जाते हैं।

हम अपनी ही दूरदर्शिता की कमी के कारण से ही बेहतरी हासिल नहीं कर पाते हैं।

हमें यह बात हमेशा याद रखना चाहिए आप भी एक बाज हैं और आप उड़ने के लिए पैदा हुए हैं ,जब कोई काम अन्य कोई कर सकता है ,सफल हो सकता है तो आप क्यों नहीं।

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धन्यवाद दोस्तों ,

आज का पोस्ट मैंने लिया है जित आपकी किताब से जिसके लेखक है –शिव खेड़ा। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो प्लीज शेयर जरूर करें। सच में आप मेरी बात को मानकर इस किताब को जरूर पड़ें। 


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तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द

आप शांति से विचार करेंगे तो ख्याल आएगा की आप आज जिस परिस्थिति में जी रहे हों उसमें कहीं ना कहीं ईश्वर का पावरफुल शब्द का इस्तेमाल आपने जाने या अनजाने में करवाया है – तथास्तु !ऐसा आपको काफी समय से से लग रहा था।

इसलिए तो लग कहते हैं की –

मैं जानता था की मुझे देर हो जाएगी –

मैं जनता ही था की हम ट्रैन चूक जायेंगे –

मैं जनता ही था की तू कुछ नहीं करने वाला नहीं है –

मैं जनता ही था की वहां कुछ मिलेगा नहीं 

मैं जनता था की ये  में टाइम पास कर रहा है कुछ खरीदेगा नहीं –

मैं जनता था की आप बीमार पड़ने  वाले हो-

मैं जनता था  उसकी बहुत लम्बी नहीं चलेगी –

मैं जनता अब धंधा  चलेगा अब बंद करने का समय आ गया है। 

मैं जनता था की तू परिवार का नाम डुबोएगी या डुबाएगा।

हम कितनी बातें ही क्यों ना जानते हों यह जानकारी या खबर कुछ नहीं है केवल अपने मन की कल्पना होती है।

पक्की कल्पना ही होती है ,श्रिस्टी के महान रहस्यों में एक रहस्य यह है की हमारी प्रत्येक कल्पना के ऊपर ईश्वर के पास देने के लिए सिर्फ  शब्द है वो है – तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द।

यूँ ही कुछ भी नहीं हुआ है ,हर कल्पना पर तथास्तु हुआ है। 

श्रिस्टी की सर्वोत्तम सत्ता यह नहीं देखती है आपको क्या चाहिए ये आपकी मन से उत्पन्न कल्पना की तरंगों को पहचानती है और आपकी ख़िदमती में इसे वास्तविकता में आपके सामने पेश करती है।

तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द है। वह तो मात्र तथास्तु करते हैं चाहे आपके मन की कल्पना आपके विचार आपके जीवन में खुशियां लेट हों या दुःख।

अनजाने में भी की गई कल्पना पर भी तथास्तु। जान बूझकर की गई कल्पना पर भी तथास्तु !

और हाँ यह तथास्तु का जादू आपके जीवन में 24 घंटे चलता रहता है चाहे आप या न ,ध्यान आप देते हैं या नहीं कोइ फर्क नहीं पड़ता है इसपर। 

दोस्तों ,हमें यह तय करना है की हम तथास्तु किस पे कराना चाहते हैं वो भी सुबह जागते ही। हमें तय करना ही होगा।

आप या जिंदगी जैसी चल रही वैसी ही चलने दें या अपने मुताबिक आप डिज़ाइन करें।

आपको पता चल चूका है की तथास्तु -परमात्मा का पावरफुल शब्द।

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धनवान कैसे बने 

उम्मीद है आपको मेरा आज का पोस्ट पसंद आया होगा। अगर आपने यह पोस्ट पढ़ा है और आपके मन में कोई भी प्रश्न उत्पन्न हुए हैं आप कमेंट बॉक्स में डालकर पूछ सकते हैं। और प्लीज अच्छा लगा हो तो इसे शेयर करना न भूलें। 

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नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका

नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका – 
अपनी नियामतें गिने – दस नियामतों की सूचि बनायें। लिखें की आप क्यों कृतज्ञ हैं। अपने सूचि दोबारा पड़ें और हर नियामत के अंत में कहें धन्यवाद ,धन्यवाद ,धन्यवाद धन्यवाद। उस नियामत के अधिकतम कृतग्यता महसूस करें। 

कृतज्ञ सभी परिस्थितिओं में कृतज्ञ होता है। 

– बहाउल्ला ( 1817 – 1892 ) 

चाहे सम्बन्धोंए में उलझन हो , आर्थिक दबाव हो, स्वास्थ्य की गड़बड़ी हो या नौकरी की समस्या लम्बे समय तक कृतग्यता की कमी के कारण नकरात्मक परिस्थितयां उत्पन्न हो जाती है।

चीजों को नजरअंदाज करना नकरात्मकता का एक प्रमुख कारण है,क्यूंकि जब हम चीजों को नजरअंदाज करते हैं

तो हम  धन्यवाद नहीं दे रहे हैं और इसके फलस्वरूप अपने जीवन में आप जादू सक्रीय होने से रोक रहे हैं।

नकरात्मकता से बाहर निकलने का जादुई तरीका , आप जब भी किसी नकरात्मक स्थिति में हो तो आप क्या कह सकते हैं ,इसके उदाहरहण दिए जा रहे हैं :

मैं बहुत कृतज्ञ हूँ की इस दौरान मेरे पास अपने परिबार के लिए अधिक समय है।

मैं कृतज्ञ हूँ की खाली समय होने के कारण अब मेरा जीवन बेहतर जीवन बेहतर व्यवस्थित हो गया है – जब आपको यह लगे की आपका जीवन अव्यवस्थित हो रहा है।

मैं कृतज्ञ हूँ की मेरे पास जीवन में अधिकतर समय नौकरी रही है और मैं अनुभवी हूँ – जब आपको नौकरी में कोई दिक्कत लग रही हो तो।

मैं कृतज्ञ हूँ की रोजगार के नए-नए अवसर आ रहे हैं और हर दिन नै नौकरियां सामने आ रही है – जब आप बेरोजगार हों और नौकरी की तलाश हो। 

मैं अपने परिवार के प्रोत्साहन और समर्थन के लिए कृतज्ञ हूँ – जब आपको ऐसा लगे की आपको अपने परिवार का साथ न मिल रहा हो तो।

मैं सचमुच में कृतज्ञ हूँ की मेरे पास  क्यूंकि कठिन समय के बिच अच्छे समय भी रहे हैं और पिताजी के साथ आगे भी और अच्छे समय रहेंगे और मैं इस बात के लिए ईश्वर का कृतज्ञ हों।

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दैनिक प्रेरणा प्रत्येक दिन के लिए एक सुविचार

धन्यवाद दोस्तों ,मुझे उम्मीद है आपको मेरा आज का यह पोस्ट पसंद आया होः तो इसे शेयर करना और अपने मित्रों को बताना ना भूलें। यह पोस्ट में लिया है बेस्ट सेल्लिंग बुक्स जादू ( the secret ) रांडा बर्न। इसके लेखक हैं

और मैंने भी इस जादू को अपने जीवन में महसूस किया है शायद आपने भी। कृतग्यता में जादू है आप भी इसे महसूस करेंगे आप  से किसी को धन्यवाद और कृतज्ञ होते हैं तो आप जादू का निर्माण करते हैं जिस से कुछ भी संभव है। 


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जीवन एक भेलपुरी है- KADVE PRAVACHAN

जीवन एक भेलपुरी है , बर्फी का टुकड़ा नहीं। जीवन भेलपुरी की तरह कभी खट्टा तो कभी मीठा है। हमें ध्यान रखना होगा की जिंदगी में सुख के साथ  दुःख होना लाजमी है।

दिन के बाद रात्रि और रात्रि के बाद दिन – यह शास्वत- नियम है। दिन ही नहीं टिकता तो रात कहाँ से टिकेगी ? सुख नहीं टिकते तो दुःख कहाँ से टिकेंगे ? बुरे समय में बस यही याद रखें की जब अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे भी ज्यादा समय तक रहने वाले भी नहीं है। अँधेरा गहरा हो जाये तो समझना सुबह होने को है।

जीवन का एक-एक पल अमूल्य है। इसे व्यर्थ की निंदा में मत गवां देना।  , ऑफिस की छुट्टी है तो ऐसा नहीं सोंचना की कहीं घूम आते हैं ,किसी होटल में बढ़िया खाना खा लेते हैं।

नहीं  समय की हत्या है। छुट्टी है तो कहीं मत जाओ घर में ही बैठो भजन करो। भजन  में मन न लगे तो चादर तानकर सो जाओ लेकिन किसी की निंदा या बुराई मत करो।

आँख बड़ी नालायक है।  अनर्थों की जड़ मनुष्य की आँख ही है। आँख बिगड़ती है तो मन बिगड़ता है ,मन बिगड़ता है तो वाणी बिगड़ती है। वाणी बिगड़ती है तो व्यवहार बिगड़ती है ,व्यवहार बिगड़ता है तो पूरा जीवन बिगड़ जाता है।

सीता को देखकर रावण की आँख ही तो बिगड़ी थी तो उसका मन बिगड़ गया. फिर रावण का जीवन बिगड़ गया।


मन पर अंकुश रखने के लिए पतंग उड़ाना सीखिए। पतंगबाज जब हवा अच्छी होती है तो पतंग ढीली छोड़ देता है की , कहाँ जाती है ? मगर हवा कमजोर पड़ती है ,पतंग निचे आने लगती है तब वह डोर खिंच लेता है।

इसी प्रकार जब तुम्हारा मन शुभ और पुण्य की ओर जाता है तो जाने देना। मगर जब बुराई और पाप की ओर जाने लगे तो उसे उधर से तुरंत खिंच लेना।

चार चीजें कभी टिकती नहीं है। एक फ़क़ीर के हाथ में धन। दो चलनी में पानी। तीन श्रावक का मन और चार संत-मुनि के पैर।

चार चीजें जो कभी नहीं भरती है। एक – गाँव का शमसान। दो लोभ का गड्ढा। तीन पानी का समुद्र और चार मनुष्य का मन।

अंग्रजी के AND और END . AND का अर्थ और। थोड़ा है ,थोड़ा और चाहिए। जबकि END का अर्थ है – बस ! अब और नहीं।


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चमत्कार की उम्मीद करें -चमत्कार हो जायेगा।

चमत्कार की उम्मीद करें -चमत्कार हो जायेगा।- जब कोई व्यक्ति चमत्कार की उम्मीद करने लगता है तो उसका मस्तिष्क इतना ग्रहणशील हो जाता है की वह दरअसल चमत्कार करने लगता है।

वह चमत्कार की  वेवलेंग्थ पर पहुँच जाता है। उसकी नैसर्गिक योग्यताएं नकरात्मक के वजाय सकरात्मक रूप से केंद्रित हो जाता है। उसकी मस्तिष्क की शक्तियां सक्रीय हो जाती हैं।


 जिन नकरात्मक आशंकाओं ने उम्मीद को दूर भगा दिया था ,उनकी जगह अब सकरात्मक उम्मीदें आ जाती हैं जो सकरात्मक परिणामों को आकर्षित करती है। 


डिक्सनरी में चमत्कार की एक परिभाषा यह है  ” गुणवत्ता का अद्भुत उदाहरहण ” और हम इसी गुणवत्ता के बारे में बात करना चाहते हैं ,मस्तिष्क की वह गुणवत्ता जिसमें अद्भुत का सृजन करने की क्षमता है।

यह इस बात पर यकीं करने की काबिलियत है की हर अच्छी चीज सच हो सकती है।  यह चमत्कार की उम्मीद करने और सचमुच चम्तकार ( अद्भुत काम ) करने की क्षमता है। 


 चमत्कार की उम्मीद -करें -चमत्कार हो जायेगा- 

सबसे पहले , चमत्कार की उम्मीद करें और अद्भुत चीजों के अहसास को बढ़ाएं

प्रेरणा हासिल करें ,गहरा आत्मविश्वास रखें और कभी किसी व्यक्ति या वस्तु के कारण कम न होने दें। वाल्ट डिजनी को याद रखें।

गर्व करें  देश में रहते हैं की जहाँ चमत्कार हो सकते हैं – जहाँ अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।

हमेशा उत्साह से सोंचें – सोंचें कभी भी अपने दिमाग को वैचारिक लकवा न होने दें।

हमेसा उस बड़े विचार की तलाश में रहें जो आपकी जिंदगी बदल सकता है।

जान लें की आप खुद एक चमत्कार हैं। और यकीं रखें की सोंचने ,प्रार्थना करने ,विस्वास करने , और लोगों की मदद करने से आप चम्तकार कर सकते हैं।

याद रखें ककी चमत्कार वे लोग , जो सोंचते है की वे कर सकते हैं। 

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बेचना सीखो और सफल बनो

सवाल ही जवाब  है

धन्यवाद दोस्तों ,यह आज पोस्ट मैंने लिया है एक सहनदार किताब जिसका नाम है – बुलंद इरादे निश्चित कामयबी और जिसका लेखक हैं -नार्मन विन्सेंट पिल। आप  को पूरा पढ़ें। 

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नेतृत्व क्या है ?- who is leader ?


नेतृत्व का ना तो आपके बिज़्नेस कार्ड पर दिए गए परिचय से कुछ लेना- देना है और ना ही आपके कार्यालय के आकार से नेतृत्व का ना तो आमदनी से कुछ लेना है और ना आपके पहने जाने वाले कपड़ों से ही सरोकार है । 

नेतृत्व एक दर्शन है , एक दृष्टिकोण है ।यह मनोस्थिति है ।यह प्राकृति की दें हम में से प्रत्येक व्यक्ति को मिली हुई है ।

हर समस्या में एक अनमोल अवसर छिपा रहता है, ताकि चीज़ों में सुधार लाया जा सके । नेता वही है जो अवसर को ढूँढ निकाले ।

नदी की धारा जितनी शुद्ध होगी , उसका जल उतना ही अच्छा होगा ।

किसी संघठन का नेता जितना महान होगा , वह संघठन उतना ही सफल बनेगा ।

एक नेता होने के लिए एक बड़ा दर्जा हासिल करना ज़रूरी नहीं है ।

एक नेता होने का अर्थ है अपने कार्य को ऐसे अवसर के रूप में देखना जिससे दुनिया में बदलाव लाकर उसे बेहतर बनाया जा सके । 

फिर इससे अंतर नहीं पड़ता हैंकी आप कार्य क्या करते है । 

व्यक्तिगत बदलाव का मिथक – बहुत से लोग ऐसा मानते हैं की एक इंसान के तौर पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए उन्हें क्रांतिकारी बदलाव करने पड़ेंगे । और हम में अधिकांश लोगों के लिए यह एक भयानक विचार है । 

बिना धैर्य के कोई भी व्यक्ति प्रतिभावान नहीं हो सकता । 

आपको यह बात याद रखना चाहिए की दुनिया का निर्माण करने वाले लोग असफलता के साथ तो जी सकते हैं लेकिन वे बिना प्रयास के किए नहीं जी सकते । 

अच्छा महसूस करने के लिए अच्छा करें – निराश व्यक्ति के लिए आशावादी होना अच्छा है , बजाय एक निराशावादी के जिसके मन में कोई उम्मीद नहीं है ।

मैंने आज का या पोस्ट लिया है best selling books रॉबिन शर्मा के किताब से जिसका नाम है – जादुई सफलता पाने शुत्र । आप इस किताब को ज़रूर पड़ें। नेतृत्व क्या है ?- who is leader ? 


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